बुलंद इरादे
8–12 सितम्बर, 2026
पितृसत्ता से हो टक्कर हमारी,
और बुलंद हो आवाज़ हमारी!
जातिवाद और साम्प्रदायिकता के खिलाफ़ संघर्ष जारी,
ट्रांस-क्वीर भेदभाव नहीं सहेंगे हम—
बुलंद इरादे करते रहेंगे हम !
संवाद से बदलाव तक -पितृसत्ता, जेंडर, यौनिकता और सत्ता को साथ मिलकर समझने के लिए जुड़िए!
बुलंद इरादे एक ऐसी सहभागी कार्यशाला है जहाँ हम अपने अनुभवों, सोच और भावनाओं के ज़रिए जेंडर, पितृसत्ता, यौनिकता, सत्ता, हिंसा, मर्दानगी, जाति, धर्म और विकास के आपसी संबंधों को समझने की कोशिश करेंगे।
यह सिर्फ़ सीखने की जगह नहीं, बल्कि अपने पूर्वाग्रहों पर सवाल करने, आत्मचिंतन करने, अनुभव साझा करने और मिलकर बदलाव की कल्पना करने का एक अवसर है।
हम साथ मिलकर समझेंगे:
- सत्ता, जेंडर और पितृसत्ता क्या हैं और ये हमारी ज़िंदगी को कैसे प्रभावित करते हैं?
- यौनिकता और सहमति (Consent) को सामाजिक और राजनीतिक संदर्भों में कैसे समझें?
- जाति, जेंडर, वर्ग, यौनिकता और अन्य पहचानें एक-दूसरे से कैसे जुड़ी हैं? (Intersectionality)
- हम दमनकारी ढाँचों को कैसे पहचानें और उनके खिलाफ़ एकजुटता कैसे बनाएँ?
- शांतिपूर्ण सामाजिक बदलाव के लिए हम सामूहिक रणनीतियाँ कैसे बना सकते हैं?
कार्यशाला में होगा:
🎤 व्याख्यान
🎭 थिएटर और कला
🎶 प्रतिरोध के गीत
🎬 फ़िल्म
💬 छोटे और बड़े समूहों में चर्चा
🧩 खेल और रचनात्मक अभ्यास
🪞 व्यक्तिगत चिंतन और अनुभव साझा करना
😊 हँसी-मज़ाक और अपने आप को व्यक्त करने के कई और तरीके
आइए, अपने अनुभवों से सीखें, सवाल पूछें, संवाद करें और बदलाव की दिशा में मिलकर आगे बढ़ें।
आइए, अपने इरादे बुलंद करें!
सहजकर्ताः
नन्दिनी – नन्दिनी अपने आप को बहुत ख़ुशनसीब मानती है कि वो विभिन्न आंदोलनों का हिस्सा है, जैसे नारिवादी, विकलंगता व क्वीर हक़ इत्यादि। नन्दिनी का बस चले तो वह दिन-भर औरतों की दास्तानों को सुन सकती है, उनके आँसू और दर्द से लेकर हँसी-मज़ाक़ तक। नन्दिनी अपने आप को छात्रा, काउन्सिलर, ट्रेनर और लेखक मानती है। वो अपनी ज़िंदगी के तजुर्बों को समेटकर अपने काम में लाने की कोशिश करती है। गाने, नाचने (जब मूड करे), नई दुनिया को देखने और पहाड़ चढ़ने जैसी गतिविधियों के लिए कभी भी तैयार रहती है!
फातेमा– एक शिक्षिका, लेखिका और थिएटर ऑफ़ द ओप्रेस्ड की अभ्यासकर्ता हैं, जो रचनात्मक और सहभागिता-आधारित शिक्षण के माध्यम से राजनीतिक चेतना को बढ़ावा देती हैं। उनका काम जेंडर, जाति और संस्कृति के जटिल संबंधों को छूता है और थिएटर को संवाद, प्रतिरोध और सामूहिक आत्मचिंतन के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करता है। फातिमा एक होमस्कूलिंग माँ भी हैं जो मानती हैं कि सीखने की शुरुआत सवालों से होती है। ।
इस कार्यशाला में कौन भाग ले सकते हैं?
किसी भी जेंडर के व्यक्ति जो जानने और सीखने के इच्छुक हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है, इस कार्यशाला में भाग ले सकते हैं।
कार्यक्रम के लिये शुल्कः
पांच दिन के कार्यक्रम में भोजन और आवास का शुल्क 5000 रूपए है। हालांकि, हम इस बात में विश्वास रखते हैं कि किसी के सीखने के मौके, आर्थिक कारणों की वजह से न छूट जायें। इसलिये, हमने कुछ लोगों के लिये इस शुल्क को कम करने का प्रावधान भी रखा है| वे साथी जो आर्थिक सहायता चाहते हैं वे कृपया अपने आवेदन में इस बात का उल्लेख अवश्य करें। साथ ही, हम यह भी निवेदन करते हैं कि जो लोग अपने साथ-साथ किसी और ज़रूरतमंद साथी का खर्च उठाने में सक्षम और इच्छुक हैं, कृप्या वे भी अपने आवेदन में इस बात का उल्लेख अवश्य करें।
तारीख – 8 से 12 सितम्बर
स्थान – संभावना संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश।
संभावना पहुँचने के लिए मार्गदर्शन – https://www.sambhaavnaa.org/contact-us/
अन्य जानकारी अथवा पूछताछ के लिए –व्हाट्स एप्प/कॉल – संभावना टीम : +91-889 422 7954 (केवल 10 am – 5pm)
ईमेल – [email protected]
आवेदन के लिए, कृपया नीचे दिया गया फॉर्म भरें।